डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर 82 साल के बुजुर्ग से 10.74 करोड़ की ठगी, फरार आरोपी रोहन जाधव गिरफ्तार
पुणे
डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर 82 साल के बुजुर्ग से 10.74 करोड़ की ठगी, फरार आरोपी रोहन जाधव गिरफ्तार
पुणे : साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर 82 साल के एक बुजुर्ग को इतना डराया कि उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी में से 10 करोड़ 74 लाख 65 हजार रुपये ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर हुई इस बड़ी साइबर ठगी के मामले में पुणे साइबर पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी रोहन रामेश्वर जाधव (26) को गिरफ्तार किया है।
पुणे साइबर पुलिस स्टेशन में इस मामले में गुन्हा रजि. नं. 14/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
आधार कार्ड से फर्जी बैंक खाता खोलने की कहानी सुनाकर डराया
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने 23 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच बुजुर्ग को बताया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर उनके नाम पर केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है। यह खाता नरेश गोयल से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान सामने आने की बात कही गई।
ठगों ने बुजुर्ग से कहा कि इस खाते के संबंध में 24 लोगों ने धोखाधड़ी की शिकायत की है और अब उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इतना ही नहीं, परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तार करने की धमकी दी गई।
अचानक सामने आए इस कथित कानूनी संकट से बुजुर्ग घबरा गए। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें विश्वास दिलाया कि अगर वह इस मामले से सुरक्षित निकलना चाहते हैं तो अपने पास मौजूद सभी निवेश की रकम उनके बताए बैंक खातों में ट्रांसफर करनी होगी।
बुजुर्ग ने आरोपियों की बात पर भरोसा कर अलग-अलग खातों में रकम भेज दी और देखते ही देखते उनके साथ 10,74,65,000 रुपये की ऑनलाइन ठगी हो गई।
75 लाख के ट्रांजेक्शन ने खोला ठगी के नेटवर्क का रास्ता
जांच के दौरान साइबर पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि ठगी की रकम में से 30 जनवरी को 75 लाख रुपये एक बैंक खाते में जमा किए गए थे। इस खाते से आगे बैंक ऑफ महाराष्ट्र के तीन अलग-अलग खातों में कुल 6.50 लाख रुपये भेजे गए थे।
साइबर क्राइम पोर्टल से मिली जानकारी और सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने धीरे-धीरे इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
एक-एक कर सामने आए आरोपी
जांच में पुलिस ने सबसे पहले हर्षद सुभाष धनतोले (26), निवासी कर्वेनगर और समर्थ सुरेश देशमुख (24), निवासी कर्वेनगर को 22 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया।
इसके बाद अमर अत्तरगी (24), निवासी महात्मा फुले वस्ती, मोदीखाना, सोलापुर को 6 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया। जांच में दिल्ली निवासी प्रणव करणसिंग आर्या (31), निवासी ग्रेटर नोएडा की भूमिका भी सामने आई।
आगे की जांच में पुलिस को पता चला कि हर्षद और समर्थ का मुख्य साथी रोहन रामेश्वर जाधव है। इसके बाद रोहन फरार हो गया था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
29 साइबर अपराधों से जुड़ी कड़ियां मिलीं
पुलिस जांच में आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के जरिए 29 साइबर अपराध/एनसीआरपी शिकायतें सामने आई हैं। इससे पुलिस को संदेह है कि यह नेटवर्क केवल एक बुजुर्ग को ठगने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया।
जांच में रोहन जाधव के हांगकांग के संदिग्ध आरोपियों से संपर्क होने की जानकारी भी सामने आई। फरार होने के कारण उसके खिलाफ अदालत से नॉन-बेलेबल वारंट भी जारी किया गया था।
बैंक ट्रांजेक्शन ने फरार आरोपी तक पहुंचाया
रोहन की तलाश के दौरान साइबर पुलिस ने उसके बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और गिरोह के अन्य आरोपियों के साथ उसके संबंधों की गहराई से जांच की। पुलिस ने इन कड़ियों से जुड़े सबूत जुटाए और इन्हीं के आधार पर रोहन जाधव को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, रोहन मूल रूप से छत्रपति संभाजीनगर का रहने वाला है और वर्ष 2022 से पिंपले निलख इलाके में रह रहा था। वह सोशल मीडिया पर ‘रिलस्टार’ के रूप में काम करता था। उसका इंस्टाग्राम नाम RohanJadhav बताया गया है। आरोपी ने बी.एससी. तक शिक्षा हासिल की है।
1.34 करोड़ रुपये फ्रीज, 5,436 बैंक खातों तक पहुंची रकम
इस मामले में पुलिस अब तक 1 करोड़ 34 लाख रुपये फ्रीज करने में सफल रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि शिकायतकर्ता की ठगी गई रकम कुल 5,436 बैंक खातों में ट्रांसफर हुई।
हजारों बैंक खातों के जरिए रकम को इधर-उधर किए जाने से इस साइबर ठगी नेटवर्क की जटिलता का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल किन लोगों ने किया और ठगी की रकम आखिरकार किन-किन लोगों तक पहुंची।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराने से सावधान रहें
इस मामले ने एक बार फिर बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों के खतरनाक तरीके को सामने ला दिया है। ठग पहले सरकारी एजेंसी का नाम लेते हैं, फिर गिरफ्तारी और परिवार पर कार्रवाई का डर पैदा करते हैं। इसके बाद पीड़ित को मानसिक दबाव में लेकर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
पुणे साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सीबीआई, ईडी, पुलिस या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर कोई व्यक्ति वीडियो कॉल, फोन कॉल या मैसेज के जरिए धमकाए और पैसे मांगे तो घबराएं नहीं और किसी भी खाते में पैसा ट्रांसफर न करें।
ऐसी स्थिति में तुरंत 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
यह कार्रवाई पुणे शहर के पुलिस आयुक्त अमितेशकुमार, पुलिस सह आयुक्त संजय दराडे, अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) तेजस्वी सातपुते और पुलिस उपायुक्त (आर्थिक एवं साइबर) विवेक मासाळ के मार्गदर्शन में की गई। मामले की आगे की जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक स्वप्नाली शिंदे कर रही हैं।







